Saturday, June 15, 2013

गीतांजलि राव की ‘चाय’ : आधारभूत

 5 Short Films on Modern India 

विदेश मंत्रालय, गूगल, वायाकॉम 18 और अनुराग कश्यप की फ़िल्म निर्माण कंपनी ने मिलकर “इंडिया इज... अ विजुअल जर्नी” विषय पर पांच शॉर्ट फ़िल्में बनाई हैं। मौजूदा भारत के विभिन्न पहलुओं को दिखाती और नए विमर्शों की बयार लाती ये फ़िल्में हैं अनुभूति कश्यप की ‘मोइ मरजाणी’, श्लोक शर्मा की ‘हिडन क्रिकेट’, नीरज घैवन की ‘द एपिफनी’, वासन बाला की ‘गीक आउट’ और गीतांजलि राव की ‘चाय’। पांचों फ़िल्में यूट्यूब पर उपलब्ध हैं।

 



गीतांजलि राव की ‘चाय’ चार ऐसे लोगों की कहानी है जो अलग-अलग परिवेश और पृष्ठभूमि से आते हैं। ये अलग-अलग जगहों पर चाय बनाते हैं। इनमें एक चितौड़गढ़, राजस्थान की 18 साल की युवती है। वह किसी शहर में चाय बनाती है। दूसरा कोल्हापुर मूल का लड़का है, 10 साल का, मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर चाय बनाता और पकड़ाता है। तीसरे एक 80 साल के बुजुर्ग हैं जो केरल के किसी बस स्टैंड पर चाय की दुकान लगाते हैं। चौथा एक 19 साल का कश्मीरी लड़का है जो बरिस्ता में चाय बनाता है। फ़िल्म भारत के उन लाखों-करोड़ों लोगों को समर्पित है जो अलग रंग, ढंग और स्वाद की चाय बनाते हैं, पिलाते हैं लेकिन पीने वाले को दिखती है तो बस चाय की गिलास या कप, वह चाय बनाने वाला या वाली नहीं दिखते। शायद यही परिपेक्ष्य गीतांजलि का रहा क्योंकि पूरी फ़िल्म के दौरान चारों किरदारों की शक्ल दिखाई नहीं देती। वे बस अपनी गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं और अपनी कहानियां सुनाते हैं।

Gitanjali Rao
पांचों फ़िल्मों में ये सबसे आधारभूत है, जाहिर है चाय से आधारभूत देश में क्या होगा। इन्हीं कहानियों में समाज की सोच और बदलाव भी छिपे मिलते हैं। मूलतः गीतांजलि एक एनिमेटर हैं। इसके अलावा वह फ़िल्मकार और रंगकर्मी भी हैं। उन्होंने मुंबई के जेजे इंस्टिट्यूट ऑफ अप्लाइड आर्ट से फाइन आट्र्स की पढ़ाई की। उनकी एनिमेटेड फ़िल्म ‘प्रिंटेड रेनबो’ को 2006 में फ्रांस के कान फ़िल्म महोत्सव के क्रिटिक्स वीक में दिखाया गया। वहीं इसे बेस्ट शॉर्ट फ़िल्म के तीन पुरस्कार भी मिले। विश्व के 100 से ज्यादा फ़िल्म महोत्सवों में जाकर आ चुकी ‘प्रिंटेड रेनबो’ को 2008 के ऑस्कर पुरस्कारों की आखिरी 10 फ़िल्मों में भी चुना गया।

इसके अलावा उन्होंने ‘ब्लू’, ‘ऑरेंज’ और ‘गिरगिट’ जैसी उम्दा एनिमेटेड शॉर्ट फ़िल्में बनाई हैं। ‘कलाइडोस्कोप’ को देखना भी अनूठा अनुभव है। गीतांजलि ने अनेकों विज्ञापनों में अपनी जादुई रचनात्मकता दिखाई है। यहां पर वे पूरी की पूरी विज्ञापन फ़िल्में उपलब्ध हैं, एक-एक करके सभी देखें, आनंद आएगा। साथ ही, अनुराग कश्यप फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड की हर फ़िल्म से पहले लोगो का जो विजुअल नजर आता है जिसमें चांद पर चढ़ी बिल्ली की आकृति ‘ए’ अक्षर बन जाती है, वह भी गीतांजलि ने ही बनाया है।

(बातचीत के लिए गीतांजलि राव उपलब्ध नहीं हो पाईं)

Gitanjali Rao is an animator, film maker and theatre artist. She graduated with honors as a Bachelor of Fine Arts from Sir J. J. Institute of Applied Art, Mumbai, in 1994. She has made a couple of animated shorts like ‘Printed Rainbow’ (Short listed in the last ten films for the Oscars in 2008), ‘Orange’, ‘Blue’ and ‘Girgit’. Her string of popular and award winning commercials can be seen here. Her most recent work in ‘Chai’, a short film made for ‘India Is’ campaign.
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